दोस्तों आज में आपको थोड़ा गहराई से इम्यून सिस्टम के बारे में बताने जा रहा हूँ | पिछली पोस्ट में हमने कुछ मूलभूत जानकारी दी थी | आइए दोस्तों शुरुआत करते हैं -
हमारे खून में मूल रूप से दो प्रकार की कोशिकाएँ होती है -
(1) लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC) - इनका मूल कार्य शरीर में ऑक्सीजन को पहुँचाना होता है | खून में हीमोग्लोबिन के कारण लाल रंग का होता है |
(2) श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) - इनका मूल कार्य शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को नष्ट करना है या शरीर की रोगो से रक्षा करना हैं | इनके अलावा खून में कई कोशिकाएं व प्लाज़्मा भी मौजूद होता है जो रोगाणुओं से लड़ने में WBC की मदद करता हैं |जिनमे प्रमुख है - Natural killers (NK),न्युट्रोफिल्स (neu),Macrophas,डेनड्रिटिक सेल्स |
जब रोगाणु शरीर में प्रवेश करता है तो इम्यून सिस्टम के लगातार सक्रिय होने के कारण इसका सामना natural killers से होता हैं | NKs रोगाणु से लड़ते है और इसे मारने की कोशिश करते है |
यहाँ न्यूट्रोफिल्स रोगाणु में मौजूद प्रोटीन का पता लगाता है और NKs की मदद करने के लिए लड़ता है |यह रोगाणु के टुकड़े टुकड़े कर फेंक देता है |यह एक प्राथमिक क्रिया है जिसमे NKs और न्युट्रोफिल्स रोगाणु को मारने का प्रयास करते है | यदि इनको सफलता मिलती है तो ठीक है वरना macrophasअपने आकार में बदलाव लाकर रोगाणु का पाचन कर देता है और टुकड़ो में बदल देता है | किन्तु इसकी यह जिम्मेदारी है कि रोगाणु की सूचना T-cells तक पहुचायें , इसीलिए यह रोगाणु का टुकड़ा एंटिना रुपी गर्त में लगा लेता है | यहाँ डेनड्रिटिक कोशिका इसकी मदद करती है | T-cells तक सूचना पहुंचाने के लिए मैक्रोफास , डेनड्रिटिक कोशिका cytokines chemical factor का स्राव करते है |
यह केमिकलफेक्टर ही रोगाणु का संकेत है| अब सभी प्रतिरक्षी कोशिकाएँ केमिकल की और दौड़ती है ,जिनमे T-cells भी शामिल होती है | T-cells मैक्रोफास से उस और से बन्द बनाती है जिस और रोगाणु का टुकड़ा संकेत के रूप में लगा है | यह रोगाणु के प्रोटीन की सूचना के लिए विशेष प्रकार का केमिकल स्राव करती है और B-cells सक्रिय हो जाती है | अंत में T-cells की सुचना के आधार पर B-cells antibody निर्माण करती है जो एक प्रकार की प्रोटीन है और रोगाणु की प्रोटीन के विपरीत प्रकृति की होती है यह एंटीबाडी रोगाणु को नष्ट कर देती है |

यहाँ एक तथ्य यह है कि B-cells इस एंटीबाडी का प्रारूप संजोकर रखती है ताकि भविष्य में यही रोगाणु फिर से आये तो एंटोबोडी आसानी से बन सके |
इसी कारण पहली बार कोई बीमारी होने पर दुष्प्रभाव अधिक होता है परन्तु वही बीमारी दोबारा होने पर दुष्प्रभाव काम होता है |
हमारे खून में मूल रूप से दो प्रकार की कोशिकाएँ होती है -
(1) लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC) - इनका मूल कार्य शरीर में ऑक्सीजन को पहुँचाना होता है | खून में हीमोग्लोबिन के कारण लाल रंग का होता है |
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| RBC=RED BLOOD CELLS (ONLY RED) |
(2) श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) - इनका मूल कार्य शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को नष्ट करना है या शरीर की रोगो से रक्षा करना हैं | इनके अलावा खून में कई कोशिकाएं व प्लाज़्मा भी मौजूद होता है जो रोगाणुओं से लड़ने में WBC की मदद करता हैं |जिनमे प्रमुख है - Natural killers (NK),न्युट्रोफिल्स (neu),Macrophas,डेनड्रिटिक सेल्स |
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| WBC=WHITE BLOOD CELLS |
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| WBC , RBC & DENDRATIC CELLS |
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| ALL IMMUNE CELLS |
यहाँ न्यूट्रोफिल्स रोगाणु में मौजूद प्रोटीन का पता लगाता है और NKs की मदद करने के लिए लड़ता है |यह रोगाणु के टुकड़े टुकड़े कर फेंक देता है |यह एक प्राथमिक क्रिया है जिसमे NKs और न्युट्रोफिल्स रोगाणु को मारने का प्रयास करते है | यदि इनको सफलता मिलती है तो ठीक है वरना macrophasअपने आकार में बदलाव लाकर रोगाणु का पाचन कर देता है और टुकड़ो में बदल देता है | किन्तु इसकी यह जिम्मेदारी है कि रोगाणु की सूचना T-cells तक पहुचायें , इसीलिए यह रोगाणु का टुकड़ा एंटिना रुपी गर्त में लगा लेता है | यहाँ डेनड्रिटिक कोशिका इसकी मदद करती है | T-cells तक सूचना पहुंचाने के लिए मैक्रोफास , डेनड्रिटिक कोशिका cytokines chemical factor का स्राव करते है |
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| MACROPHAGE |
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| ATTACK ON BACTERIA |

यहाँ एक तथ्य यह है कि B-cells इस एंटीबाडी का प्रारूप संजोकर रखती है ताकि भविष्य में यही रोगाणु फिर से आये तो एंटोबोडी आसानी से बन सके |
इसी कारण पहली बार कोई बीमारी होने पर दुष्प्रभाव अधिक होता है परन्तु वही बीमारी दोबारा होने पर दुष्प्रभाव काम होता है |
Some interested facts -
(1) macrophas और डेनड्रिटिक कोशिकाएँ रोगाणु को तोड़कर एक टुकड़ा संकेत के रूप में रख लेती है
(2) प्रतिरक्षी कोशिकाएँ केमिकल की दिशा में हीरोगाणु को मरने के लिए दौड़ती है
(3) B-cells antibody की नक़ल भविष्य में उस रोगाणु से लड़ने के लिए रख लेती है
(4) दरअसल T-cell ही B-cells को एंटीबाडी बनाने के लिए प्रेरित करता है
हमारा स्वस्थ रहना इम्युनिटी पर निर्भर रहता है | यदि इम्युनिटी मजबूत है तो इम्यून सिस्टम रोगाणुओं से आसानी से लड़कर हमारी रक्षा करता है | इम्युनिटी को मजबूत बनाना इतना आसान नहीं है | इसके लिए संतुलित आहार , व्यायाम , योग और अच्छी दिनचर्या का होना बहुत जरुरी है | लम्बे समय तक इन चीजों पर अमल करके ही प्राकृतिक इम्युनिटी को प्राप्त कर सकते हैं | इसके बावजूद भी हम कुछ प्राकृतिक घरेलु चीजों का उपयोग कर इम्युनिटी को बड़ा सकते है |
इम्युनिटी बढ़ाने के घरेलु और कारगर उपाय :-
यह वो काढ़ा है जो डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी को भी जड़ से ठीक कर देता है | इसके सेवन से प्लैटलैट्स की संख्या अति शीघ्र बढ़ जाती है | इसको बनाने के लिए सबसे पहले गिलोय की लगभग एक फुट डाली लेकर कूट ले या मिक्सी में पीस ले | इसके बाद भगोने में एक गिलास पानी डालकर गिलोय को अच्छी तरह उबाल ले | ध्यान रहे कि गिलोय को ज्यादा न उबाले वरना काढ़ा कड़वा हो जायेगा और आप इसका सेवन भी नहीं कर पाएंगे | उबालने के बाद काढ़े को गिलास में छान ले और थोड़ा चख कर देखें | यदि कड़वाहट ज्यादा है तो एक चम्मच शहद डाले और अच्छी तरह मिलाकर सेवन करें |
सबसे पहले भगोने में एक गिलास दूध ,एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर , एक बड़ी चम्मच सूप , लगभग आधा इंच पीसी अदरक 2-2 लॉन्ग व इलायची डालकर 5-7 मिनट तक उबाले | उबालने के बाद आप स्वादानुसार चीनी डालकर लगभग एक मिनट तक धीमी आंच पर गर्म कर सकते हैऔर छानकर पी सकते है , यह ध्यान दे कि diabeteis वाले चीनी न डालें |
सबसे पहले भगोने में एक गिलास पानी लेकर छिली हुई आधा इंच अदरक को बड़े बड़े टुकड़ो में काट लें और उबालना शुरू करे | अब थोड़ा गर्म होने पर एक छोटा चम्मच चाय और थोड़ी देर बाद नींबू के पीले छिलके के 7-8 टुकड़े डालें | इसके बाद 2 चम्मच चीनी डालकर 2 -3 मिनट तक उबाले | अब गैस को बंद करके ही आधा नींबू चाय में निचोड़ें और छान कर सेवन करे |

इस चाय को बनाने के लिए भगोने में एक गिलास पानी लें | अब इसमें एक इंच छिली हुई अदरक , 2 -2 लौंग और इलाइची , 5 कालीमिर्च , आधा इंच दालचीनी और एक बड़ी इलाइची अच्छी तरह कूटकर डालें इसके बाद लगभग 10 छोटी तुलसी के पत्ते डालकर 5 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें | काढ़ा तैयार होने के बाद एक छोटा चम्मच चायपत्ती और एक कप दूध डालें | इसे तब तक उबालें जब तक चाय का रंग न चढ़े | अंत में 2 चम्मच चीनी डालकर गर्म करे और छानकर पी लें |
ये पांच उपाय इम्युनिटी बढ़ाने में बहुत ही मददगार हो सकते है | ऊपर बताये गए पेयों का सेवन चाय के स्थान पर कर सकते है | जल्दी या बहुत अधिक इम्युनिटी की लालसा से इनका सेवन अधिक मात्रा में न करे, जो मात्रा बताई गई है उसी के अनुसार चीजें लें | इन पेयों का सेवन करने के बाद लगभग डेढ़ घंटे तक ए.सी. या कूलर के पास न बैठे | इनका बच्चो को सेवन न कराये तो ही ठीक रहेगा |
बच्चो की इम्मुनिटी कैसे बढ़ाए ?

मेरे प्यारे दोस्तों , इम्युनिटी का यह आर्टिकल आपको अच्छा लगा होगा और इसकी भाषा भी बड़ी आसानी से समझ में आयी होगी | इस जानकारी को साझा भी करियेगा , तो मै इस पोस्ट को यही विराम देता हूँ | नमस्कार दोस्तों |
हमारा स्वस्थ रहना इम्युनिटी पर निर्भर रहता है | यदि इम्युनिटी मजबूत है तो इम्यून सिस्टम रोगाणुओं से आसानी से लड़कर हमारी रक्षा करता है | इम्युनिटी को मजबूत बनाना इतना आसान नहीं है | इसके लिए संतुलित आहार , व्यायाम , योग और अच्छी दिनचर्या का होना बहुत जरुरी है | लम्बे समय तक इन चीजों पर अमल करके ही प्राकृतिक इम्युनिटी को प्राप्त कर सकते हैं | इसके बावजूद भी हम कुछ प्राकृतिक घरेलु चीजों का उपयोग कर इम्युनिटी को बड़ा सकते है |
इम्युनिटी बढ़ाने के घरेलु और कारगर उपाय :-
- उपाय-1 गिलोय का काढ़ा
यह वो काढ़ा है जो डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी को भी जड़ से ठीक कर देता है | इसके सेवन से प्लैटलैट्स की संख्या अति शीघ्र बढ़ जाती है | इसको बनाने के लिए सबसे पहले गिलोय की लगभग एक फुट डाली लेकर कूट ले या मिक्सी में पीस ले | इसके बाद भगोने में एक गिलास पानी डालकर गिलोय को अच्छी तरह उबाल ले | ध्यान रहे कि गिलोय को ज्यादा न उबाले वरना काढ़ा कड़वा हो जायेगा और आप इसका सेवन भी नहीं कर पाएंगे | उबालने के बाद काढ़े को गिलास में छान ले और थोड़ा चख कर देखें | यदि कड़वाहट ज्यादा है तो एक चम्मच शहद डाले और अच्छी तरह मिलाकर सेवन करें | - उपाय -2 सूप की चाय
सबसे पहले भगोने में एक गिलास दूध ,एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर , एक बड़ी चम्मच सूप , लगभग आधा इंच पीसी अदरक 2-2 लॉन्ग व इलायची डालकर 5-7 मिनट तक उबाले | उबालने के बाद आप स्वादानुसार चीनी डालकर लगभग एक मिनट तक धीमी आंच पर गर्म कर सकते हैऔर छानकर पी सकते है , यह ध्यान दे कि diabeteis वाले चीनी न डालें | - उपाय -3 दालचीनी और अजवाइन की चाय
- उपाय -4 नीम्बु की चाय
सबसे पहले भगोने में एक गिलास पानी लेकर छिली हुई आधा इंच अदरक को बड़े बड़े टुकड़ो में काट लें और उबालना शुरू करे | अब थोड़ा गर्म होने पर एक छोटा चम्मच चाय और थोड़ी देर बाद नींबू के पीले छिलके के 7-8 टुकड़े डालें | इसके बाद 2 चम्मच चीनी डालकर 2 -3 मिनट तक उबाले | अब गैस को बंद करके ही आधा नींबू चाय में निचोड़ें और छान कर सेवन करे |
- उपाय - 5 दालचीनी और तुलसी की चाय

इस चाय को बनाने के लिए भगोने में एक गिलास पानी लें | अब इसमें एक इंच छिली हुई अदरक , 2 -2 लौंग और इलाइची , 5 कालीमिर्च , आधा इंच दालचीनी और एक बड़ी इलाइची अच्छी तरह कूटकर डालें इसके बाद लगभग 10 छोटी तुलसी के पत्ते डालकर 5 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें | काढ़ा तैयार होने के बाद एक छोटा चम्मच चायपत्ती और एक कप दूध डालें | इसे तब तक उबालें जब तक चाय का रंग न चढ़े | अंत में 2 चम्मच चीनी डालकर गर्म करे और छानकर पी लें |
ये पांच उपाय इम्युनिटी बढ़ाने में बहुत ही मददगार हो सकते है | ऊपर बताये गए पेयों का सेवन चाय के स्थान पर कर सकते है | जल्दी या बहुत अधिक इम्युनिटी की लालसा से इनका सेवन अधिक मात्रा में न करे, जो मात्रा बताई गई है उसी के अनुसार चीजें लें | इन पेयों का सेवन करने के बाद लगभग डेढ़ घंटे तक ए.सी. या कूलर के पास न बैठे | इनका बच्चो को सेवन न कराये तो ही ठीक रहेगा |
बच्चो की इम्मुनिटी कैसे बढ़ाए ?
- बच्चो की इम्युनिटी अभिभावक द्वारा भरण-पोषण पर निर्भर करती है |
- बच्चो की इम्युनिटी के लिए मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध अच्छी गुणवत्ता के इम्मूनिटी बूस्टर पाउडर का उपयोग सबसे बेस्ट रहेगा |
- हमेशा बच्चो को घर पर बना खाना खिलाये , बाहर का डिब्बाबंद और जंक खाना न दें
- बच्चो को रोजाना ताज़ी पत्तेदार सब्जियों के सूप पिलायें , इसके साथ ही टमाटर-गाजर-चुकनदर का सूप भी पिला सकते है| खाने में हरी सब्ज़ी जरूर शामिल करे |
- बच्चो को रोजाना 4 -5 अलग-अलग प्रकार के फल खिलाएं
- बच्चो को जूस बहुत ही कम पिलाये क्योंकि इनमे पाई जाने वाली शक्कर इम्युनिटी घटाती है
- बच्चो को दही ,पनीर आदि खिलाये क्योंकि इनसे पाचन क्रिया ठीक रहती हैं
- बच्चो को भरपूर नींद लेने दे |

मेरे प्यारे दोस्तों , इम्युनिटी का यह आर्टिकल आपको अच्छा लगा होगा और इसकी भाषा भी बड़ी आसानी से समझ में आयी होगी | इस जानकारी को साझा भी करियेगा , तो मै इस पोस्ट को यही विराम देता हूँ | नमस्कार दोस्तों |








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